नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर युद्ध, टैरिफ और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। खपत, विनिर्माण और कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक विकास को नई गति दी है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है। वहीं सांकेतिक जीडीपी 346.36 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
खपत, विनिर्माण और कृषि ने दिखाई मजबूती
आर्थिक वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान निजी खपत, विनिर्माण गतिविधियों और कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का रहा। विनिर्माण उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कृषि क्षेत्र ने भी लगातार सकारात्मक योगदान दिया। सेवा क्षेत्र में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला।
पूरे वित्त वर्ष में 7.9% वृद्धि का अनुमान
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय ने आर्थिक गतिविधियों को मजबूती प्रदान की है।
खुदरा महंगाई बढ़कर 5.1% रहने का अनुमान
रिजर्व बैंक और अन्य एजेंसियों के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
RBI ने घटाया विकास दर का अनुमान
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगले वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल माना जा रहा है।



