रायपुर। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बाद अब खाने के तेल की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच महीनों में विभिन्न ब्रांडों के खाद्य तेलों की कीमतों में 25 से 35 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है। जो तेल जनवरी में 134-135 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, वह अब 160 से 165 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
व्यापारियों के अनुसार, बड़े ब्रांडों के कुछ खाद्य तेलों की कीमतें 190 से 225 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
पांच महीने में 30 रुपये तक बढ़े दाम
बाजार में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी में खाद्य तेल की कीमत 134-135 रुपये प्रति लीटर थी। फरवरी में यह 136-138 रुपये, मार्च में 142 रुपये, अप्रैल में 145 रुपये, मई में 155-160 रुपये और जून में 160-165 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। यानी पांच महीने में करीब 25 से 30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
पैकिंग में भी खेल, उपभोक्ता परेशान
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई कंपनियां एक लीटर के बजाय 800 से 900 मिलीलीटर पैक को आकर्षक पैकिंग में बेच रही हैं, जिससे ग्राहक भ्रमित हो जाते हैं। कीमत अधिक होने के बावजूद मात्रा कम मिलने से लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
कैटरिंग कारोबार पर भी असर
खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कैटरिंग और होटल व्यवसाय पर भी दिखाई देने लगा है। कारोबारियों के मुताबिक तेल की लागत बढ़ने से भोजन तैयार करने का खर्च करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसका असर सेवाओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है।
सरसों और सोयाबीन तेल भी महंगे
सिर्फ रिफाइंड तेल ही नहीं, बल्कि सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है। थोक और खुदरा बाजारों में दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।



