NEET UG 2027 से कंप्यूटर-बेस्ड फॉर्मेट में आयोजित होगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा फैसला लिया। NEET 2026 री-एग्जाम 21 जून को होगा।
NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार, 15 मई को घोषणा की कि साल 2027 से NEET UG परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर-बेस्ड फॉर्मेट (CBT Mode) में आयोजित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली अपनाने से पेपर लीक और धांधली जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, निरस्त की गई NEET UG 2026 परीक्षा का री-एग्जाम अब 21 जून को होगा, जिसमें छात्रों को OMR शीट भरने के लिए 15 मिनट अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा।
छात्रों को मिलेगा 15 मिनट का अतिरिक्त समय
शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नीट यूजी 2026 की निरस्त हुई परीक्षा के लिए नई तारीख तय कर दी है। अब यह री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। आपको बता दें कि 3 मई को हुई मूल परीक्षा को गड़बड़ी के चलते रद्द कर दिया गया था।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि पुन: परीक्षा के लिए छात्रों से किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, छात्रों की सुविधा के लिए ओएमआर शीट भरने के लिए अब 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान बोले- शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
पेपर लीक की जड़ तक पहुंचने के लिए सरकार ने मामले की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि विवाद की शुरुआत एक ‘गेस पेपर’ की शिकायत से हुई थी, जिसके सवाल वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खा रहे थे।
7 मई को मिली शिकायत के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने सघन जांच शुरू की, जिसमें यह पुष्टि हुई कि गेस पेपर के नाम पर असली सवाल लीक किए गए थे। मंत्री ने कहा कि हम किसी भी मेधावी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे और शिक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सरकार ने पहले राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद गड़बड़ी सामने आने पर अब सीधे तकनीकी बदलाव का रास्ता चुना गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 2025 और 2026 में सुधारों के बावजूद हुई इस घटना ने हमें परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल करने पर मजबूर किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के भविष्य के डॉक्टरों का चयन पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण में हो।



