ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और कॉर्पोरेट घरानों के बढ़ते दखल के विरोध में आज देशभर के करीब 15 लाख दवा विक्रेताओं ने हड़ताल कर अपनी दुकानें पूरी तरह से बंद रखने का ऐतिहासिक फैसला किया है।
ऑनलाइन फार्मेसी, कॉर्पोरेट चेन स्टोर्स की मनमानी और बिना डॉक्टर के पर्चे के इंटरनेट पर धड़ल्ले से बेची जा रही दवाओं के विरोध में आज पूरे देश में दवा दुकानों की बड़ी हड़ताल बुलाई गई है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आज बुधवार को देश के करीब 15 लाख केमिस्ट और ड्रगिस्ट अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रख रहे हैं।
यह हड़ताल सुबह से शुरू होकर आज रात 12 बजे तक जारी रहेगी, जिसके चलते सुबह से ही आम मरीजों को जीवन रक्षक दवाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों हो रही है हड़ताल, केमिस्ट एसोसिएशन की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि देश में कई बड़े कॉर्पोरेट घराने और ऑनलाइन दवा कंपनियां नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भारी डिस्काउंट के साथ दवाएं बेच रही हैं, जिससे पारंपरिक खुदरा दवा विक्रेताओं का धंधा पूरी तरह चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है।
केमिस्टों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी वैध मेडिकल प्रीस्क्रिप्शन के भी नशीली और गंभीर मानसिक रोगों से जुड़ी दवाएं आसानी से घर बैठे डिलीवर की जा रही हैं, जिससे देश की युवा पीढ़ी में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार को बार-बार चेतावनी देने के बाद भी ई-फार्मेसी के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अस्पतालों के अंदर वाले मेडिकल स्टोर खुले, इमरजेंसी सेवाएं बहाल
इस देशव्यापी बंद के दौरान आम जनता और गंभीर मरीजों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने कुछ रियायतें भी दी हैं। देश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के परिसर के भीतर संचालित होने वाले मेडिकल स्टोर्स को इस हड़ताल के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
इसके अलावा, जो दुकानें चौबीस घंटे इमरजेंसी सेवाएं प्रदान करती हैं, वे भी खुली हुई हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को वेंटिलेटर, ऑक्सीजन या अन्य जीवन रक्षक दवाओं के लिए न भटकना पड़े। हालांकि, रिहायशी इलाकों और मुख्य बाजारों में स्थित आम रिटेल और होलसेल दुकानें पूरी तरह बंद हैं।
दिल्ली-यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक, जानिए अपने राज्यों के जमीनी हालात
इस देशव्यापी हड़ताल का असर उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान सहित देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में सुबह से ही देखने को मिल रहा है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में थोक और खुदरा दवा मंडियां पूरी तरह सुनसान नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने भी इस बंद का शत-प्रतिशत समर्थन किया है, जिसके कारण राज्य के छोटे-बड़े शहरों में सुबह से फुटकर दुकानें नहीं खुली हैं।
एसोसिएशन का दावा है कि अगर सरकार ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान लेकर ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया, तो भविष्य में केमिस्ट अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे।



