Manoj Bajpayee: हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी ने अपनी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर हुए विवाद पर बात की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के नाम को लेकर शुरू हुई बहस ने देखते ही देखते बड़ा रूप ले लिया था और इस दौरान उन्हें ट्रोलिंग, आलोचनाओं और निजी हमलों का भी सामना करना पड़ा था।
परिवार को भी करना पड़ा सामना
मनोज के मुताबिक, विवाद सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रियाओं के बीच उनके परिवार का नाम भी चर्चा में लाया गया। अभिनेता का कहना है कि ऐसी परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति के लिए असहज हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा।
विरोध के बाद बदला रुख
अभिनेता ने बताया कि जैसे ही उन्हें महसूस हुआ कि फिल्म के नाम को लेकर कुछ वर्गों में नाराजगी है, टीम ने मामले को गंभीरता से लिया। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक काम का उद्देश्य लोगों को ठेस पहुंचाना नहीं होता, इसलिए आपत्तियों को नजरअंदाज करने के बजाय समाधान तलाशना जरूरी था।
‘एक नाम से फिल्म नहीं बनती’
मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी फिल्म की असली पहचान उसकी कहानी और किरदार होते हैं, केवल शीर्षक नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि अगर किसी नाम को लेकर विवाद खड़ा हो जाए, तो उसे बदलना किसी रचनात्मक व्यक्ति के लिए बड़ी चुनौती नहीं है।
काम पर रखा पूरा फोकस
विवाद और आलोचनाओं के बावजूद मनोज ने अपने काम की रफ्तार धीमी नहीं होने दी। उनका कहना है कि ऐसे समय में बहसों में उलझने के बजाय अपने पेशेवर दायित्वों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी होता है।



