शराब घोटाला: न्यायालय ने मुकदमो को छत्तीसगढ़ स्थानांतरित करने की याचिका पर सुनवाई की

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले के मुकदमे को स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सह-आरोपियों को होने वाली संभावित मुश्किलों पर ंिचता जताई। इस घोटाले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों जगहों पर प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने शराब घोटाले के आरोपियों में शामिल छत्तीसगढ़ सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी निरंजन दास की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और शोएब आलम की दलीलें सुनीं। दास ने उत्तर प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित मुकदमे को छत्तीसगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की है, और कहा है कि दोनों राज्यों में आरोप काफी हद तक एक जैसे हैं और एक ही साजिश का हिस्सा हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप कह रहे हैं कि दोनों राज्यों में आरोप एक जैसे हैं। लेकिन कोआॅर्डिनेट बेंच का कहना है कि वे राज्य-केंद्रित हैं।’’ पीठ ने उन व्यावहारिक मुश्किलों पर भी ध्यान दिलाया जो उत्तर प्रदेश में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित मुकदमा स्थानांतरित होने पर आ सकती हैं।
अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी मामले के सह-आरोपी हैं, और मामला स्थानांतरित करने से उन पर बुरा असर पड़ सकता है।

बाद में विभिन्न दलीलों पर ध्यान देते हुए पीठ ने आदेश दिया कि एक जैसे तीनों संबंधित मामले एक साथ जोड़े जाएं और 19 जनवरी को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाएं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, राज्य में शराब घोटाला 2019 और 2022 के बीच भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के समय में हुआ था।

उनका कहना है कि इस कथित घोटाले से राज्य के खजाने को ‘भारी नुकसान’ हुआ और शराब ंिसडिकेट के लाभार्थियों की जेबें भरी गईं।
कथित घोटाले का मुख्य मकसद राज्य की आबकारी नीति में हेरफेर करना था।

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