नई दिल्ली: कॉकरोच अब सिर्फ नाली और गंदगी में पाए जाने वाले कीड़े का नाम नहीं रह गया है। हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से यह सियासी चर्चाओं में भी आ गया है। लेकिन असली कॉकरोच यानी तिलचट्टे का इतिहास इससे भी ज्यादा दिलचस्प है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कॉकरोच करीब 30 से 35 करोड़ साल पहले से धरती पर मौजूद हैं, यानी ये डायनासोर से भी पुराने जीव हैं।
यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मिले जीवाश्म इस बात की पुष्टि करते हैं कि कॉकरोच प्राचीन काल से धरती पर जीवित हैं। करीब 6.6 करोड़ साल पहले जब उल्कापिंड के टकराने से डायनासोर विलुप्त हो गए, तब भी कॉकरोच बच गए। वैज्ञानिक मानते हैं कि उनकी अद्भुत जीवित रहने की क्षमता, कम भोजन में जीवित रहना और तेज प्रजनन इसके मुख्य कारण हैं।
भारत में भी कॉकरोच के प्राचीन अस्तित्व के प्रमाण मिले हैं। वर्ष 2024 में बीकानेर की कोयला खदान में करीब 5.3 करोड़ साल पुराने कॉकरोच के जीवाश्म मिले थे, जिससे वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
‘कॉकरोच’ शब्द की उत्पत्ति स्पेनिश शब्द ‘कुकराचा’ (Cucaracha) से मानी जाती है, जिसे बाद में अंग्रेजी में Cockroach कहा जाने लगा। हिंदी में इसे तिलचट्टा कहा जाता है। माना जाता है कि पुराने समय में यह तेल और घी के दीयों के पास मंडराते थे, इसलिए इसका यह नाम पड़ा।



