छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ का पॉवर कंपनियों में कार्यरत संविदा कर्मियों का नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। संघ, राज्य सरकार और विद्युत कंपनी से नियमितीकरण की मांग को लेकर लगातार प्रयास कर रहा आया है किंतु कंपनी प्रबंधन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही न किये जाने से हताश होकर संघ ने घोषणा किया है कि 25 मई 2026, सोमवार को दोपहर 3:00 बजे से बिजली कंपनी मुख्यालय, डंगनिया रायपुर के सामने शांति पूर्ण तरीके से आम सभा प्रदर्शन एवं गेट मीटिंग आयोजित किया गया।
संविदा कर्मचारियों किस कारण से आंदोलन कर रहे हैं –
1- 8-10 साल से संविदा परवर्ष : 2016 और 2018 में मेरिट, शारीरिक दक्षता परीक्षा, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और आरक्षण नियमों का पालन करते हुए भर्ती हुए। जबकि 2007, 2010, 2011 बैच के संविदा कर्मचारियों को 2 साल में नियमित कर दिया गया था, किंतु आज पर्यन्त तक 2016 और 2018 बैच के संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है।
2- जोखिम भरा कार्य संविदा कर्मी : बिना लाइनमैन के पोल पर चढ़ना, लाइन सुधार, परमिट लेना जैसे जानलेवा कार्य कर रहे हैं। 2021 से पहले 40+ संविदा कर्मी ड्यूटी के दौरान शहीद हुए, 100+ स्थायी रूप से दिव्यांग हुए। छ.ग. पॉवर कंपनी प्रबंधन द्वारा अनुकंपा नियुक्ति देने में भी सौतेला व्यवहार करती है।
3- पद खाली, कार्य भार बढ़ा :
विद्युत विभाग में 4500+ नियमित लाइन परिचालक के पद खाली हैं। 2011 के बाद कोई नियमित भर्ती नहीं हुआ है। नियमित कर्मचारी अब वृद्ध हो चुके हैं, फील्ड वर्क करने में असमर्थ हैं।
4- बोर्ड का निर्णय भी लागू नहीं :
1 जुलाई 2015 को संचालक मंडल ने निर्णय लिया था कि 6 साल संतोषजनक सेवा पूरी करने पर संविदा कर्मियों को रिक्त पदों पर नियमित किया जाएगा। 8-10 साल बाद भी निर्णय लागू नहीं हुआ।
5- कानूनी आधार :
1- सुप्रीम कोर्ट ने कार्य के लिए संविदा पर रखना अवैध ठहराया : नियमितीकरण अनिवार्य।
2- औद्योगिक नियोजन स्थायी आदेश अधिनियम 1963 : विभाग ने 1 जुलाई 2023 को अपनाया।
3- संविधान अनुच्छेद 14, 16, 21 : समान काम समान वेतन, अवसर की समानता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार।
6- विरोधाभासी HR पॉलिसी 2025 :
विभाग ने नई नीति में संविदा कर्मियों से पोल पर चढ़ना और परमिट लेना अनिवार्य कर दिया, जबकि यह कार्य तकनीकी रूप से केवल सहायक लाइन मेन या उससे उच्च पद पर पदस्थ नियमित कर्मचारियों को अधिकृत है।
संघ का बयान :
“हम 10 साल से छत्तीसगढ़ को रोशन कर रहे हैं, लेकिन खुद हमारे घरों में अंधेरा है। अगर हम काम बंद कर दें तो पूरा प्रदेश ब्लैकआउट में चला जाएगा। हमारी उम्र अब दूसरी नौकरी के लायक नहीं बची। 4500 पद खाली होने के बावजूद हमें न्याय नहीं मिल रहा।”
मांग :
पॉवर कंपनी में कार्यरत समस्त संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण / रिक्त पद पर समायोजन / संविलियन किया जाए।



