बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई एक युवती की याचिका स्वीकार करते हुए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने पीड़िता को छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सिम्स) या जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि भ्रूण का DNA सैंपल रेफरेंस के लिए सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया और जांच में इसका उपयोग किया जा सके।
पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा था कि वह जबरन यौन संबंध के कारण गर्भवती हुई है और वह इस गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती। उसने अदालत से मेडिकल विशेषज्ञों की टीम बनाकर जांच कराने और जल्द गर्भपात की अनुमति देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एन.के. व्यास की वेकेशन बेंच ने कहा कि रेप पीड़िता को यह तय करने का अधिकार और स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या नहीं।
कोर्ट ने पाया कि पीड़िता 14 से 16 सप्ताह की गर्भवती है और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत उसकी याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान की। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों और न्यायिक संवेदनशीलता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



