रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़े कथित 584 करोड़ रुपये के राशन घोटाले को लेकर विधानसभा जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट में तत्कालीन खाद्य सचिव, खाद्य संचालक समेत कुल 204 अधिकारियों को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार माना गया है।
रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2022 से फरवरी 2023 के बीच राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। जांच समिति ने 23 जिला खाद्य नियंत्रकों और 181 खाद्य निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की है। समिति ने अपने निष्कर्षों में प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी की कमी और वितरण प्रक्रिया में व्यापक विसंगतियों का उल्लेख किया है।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक धर्मलाल कौशिक ने दावा किया है कि जांच केवल एक वर्ष की अवधि तक सीमित रही है। उनका कहना है कि यदि पूर्ववर्ती सरकार के पूरे कार्यकाल की विस्तृत ऑडिट जांच कराई जाए तो खाद्यान्न हेराफेरी का आंकड़ा 2,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
इस मामले की शुरुआत विधानसभा में उठे सवालों से हुई थी, जिसके बाद जांच समिति का गठन किया गया। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।
रिपोर्ट ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर राज्य सरकार द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।



