पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जहां करीब 100 पार्षदों के इस्तीफे के बीच सांसद काकोली घोष और 6 टीएमसी विधायक सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए।
पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता पर काबिज हुई भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है।
राज्य में टीएमसी के भीतर अंदरूनी असंतोष इस कदर बढ़ गया है कि विभिन्न नगरपालिकाओं के करीब 100 पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच, टीएमसी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार और पार्टी के 6 बागी विधायकों का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक ही मंच पर नजर आना ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में काकोली घोष और 6 विधायकों की मौजूदगी
उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक में टीएमसी की फायरब्रांड सांसद काकोली घोष की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को बेहद तेज कर दिया है, जिन्होंने हाल ही में टीएमसी के जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था।
काकोली घोष के अलावा इस बैठक में देंगा से टीएमसी विधायक अणीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक भी आधिकारिक रूप से शामिल हुए।
हालांकि, बैठक में शामिल हुए टीएमसी विधायकों ने मीडिया के सामने यह दलील दी कि वे केवल अपने क्षेत्रों के विकास संबंधी मुद्दों और प्रशासनिक चर्चा के लिए वहां पहुंचे थे, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी में एक बड़ी टूट की शुरुआत मान रहे हैं।
1998 के बाद तृणमूल कांग्रेस के सामने खड़ा हुआ सबसे बड़ा संकट
साल 1998 में कांग्रेस से अलग होकर जब ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था, उसके बाद से पार्टी के सामने आया यह अब तक का सबसे गंभीर और बड़ा संकट है। यह संकट इतना गहरा हो गया है कि अगले साल होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले ही राज्य की कई महत्वपूर्ण नगरपालिकाओं के बोर्ड समय से पहले भंग किए जा सकते हैं।
इस उथल-पुथल के बीच ऐसी अटकलें भी बेहद तेज हैं कि ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने भी अपने पद को छोड़ने की इच्छा जताई है। हालांकि, हाल ही में ममता बनर्जी ने खुद अपने पार्षदों और विधायकों से भावुक अपील करते हुए इस्तीफा न देने की बात कही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी यह अपील पूरी तरह बेअसर साबित होती दिख रही है।



