छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और स्थानीय अधिकारों को लेकर अब नई राजनीतिक चेतना देखने को मिल रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर लोगों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना रही है। संगठन का कहना है कि राज्य गठन के बाद से अब तक राष्ट्रीय दलों ने सिर्फ सत्ता हासिल करने का काम किया, लेकिन प्रदेश की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
संगठन के अनुसार आज भी दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय हो रहा है। आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। वहीं प्रदेश के संसाधनों का लाभ बाहरी लोगों को अधिक मिला, जबकि स्थानीय लोग शोषण का शिकार होते रहे।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना का कहना है कि हर चुनाव में बड़े-बड़े वादे कर जनता से वोट लिए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता की आवाज दबा दी जाती है। अब प्रदेश की जनता जागरूक हो रही है और क्षेत्रीय नेतृत्व को समर्थन देने का मन बना रही है।

कौन हैं अमित बघेल?
जोहार छत्तीसगढ़ Party के प्रमुख अमित बघेल एक किसान परिवार से आते हैं। संघर्ष के दम पर उन्होंने गरीबों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों की आवाज बनकर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना का गठन किया, जो प्रदेश में कहीं भी अन्याय होने पर सबसे पहले आवाज उठाने का दावा करती है।
संगठन का कहना है कि छत्तीसगढ़िया विचारधारा को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी गांव-गांव और जन-जन तक पहुंच बना रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि आने वाले चुनाव में जनता का भरोसा उन्हें मिलता है, तो प्रदेश को पहली बार पूरी तरह क्षेत्रीय सोच वाली सरकार मिल सकती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार अमित बघेल एक कद्दावर क्षेत्रीय नेता के रूप में उभर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना भी लगातार अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करते हुए लोगों के दिलों में जगह बना रही है।



