डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 4 में आयोजित शिविर में वार्ड के बड़ी संख्या में रहवासी वर्षों से लंबित आवासीय पट्टों की मांग को लेकर शिविर में पहुंचे थे। लोगों का कहना था कि वे लंबे समय से जमीन पर निवास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। शिविर में मौजूद अधिकारियों से तत्काल समाधान की मांग की गई, लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आक्रोशित लोगों ने विरोध स्वरूप शिविर स्थल में तालाबंदी कर दी।
इसके बाद पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया। प्रशासनिक अधिकारियों की शिकायत पर डोंगरगढ़ पुलिस ने पूर्व पार्षद कृष्णा लिलहारे, वर्तमान पार्षद प्रीति समुंद्रे सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। वहीं पुलिस द्वारा पूर्व पार्षद कृष्णा लिलहारे को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद कांग्रेस खुलकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्थानीय तहसील कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जनता के हक और आवासीय पट्टों की मांग उठाने वालों पर कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
कांग्रेस ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कांग्रेसियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहारा सेवा सहकारी समिति में कथित अवैध धान बिक्री मामले में ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद तत्काल एफआईआर नहीं की गई, जबकि पट्टे की मांग को लेकर आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि पर देर रात कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया। विपक्ष ने इसे सत्ता के दबाव में की गई “चयनात्मक कार्रवाई” बताया है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्व पार्षद कृष्णा लिलहारे की जल्द रिहाई नहीं हुई और पट्टे की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।



