बंगाल में हार के बाद ममता सख्त: बोलीं- जिन्हें जाना है जाएं, मैं जबरदस्ती नहीं रोकूंगी, TMC को फिर से खड़ा करूंगी

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने और सालों बाद सबसे बड़े चुनावी झटके का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का किला पूरी तरह ढह गया है। राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है।

इस ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों के बीच, ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले सभी पार्टी उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाने और संगठन में जान फूंकने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की।

 

​पार्टी के अंदरूनी हालात और पाला बदलने की अटकलें
​कालीघाट में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में ममता बनर्जी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे। चुनाव नतीजों के बाद से ही लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं कि कई टीएमसी नेता और नवनिर्वाचित विधायक पाला बदलकर दूसरी पार्टियों में जा सकते हैं। इस मुश्किल दौर के बीच ममता बनर्जी ने बेहद बेबाकी से बात की और साफ किया कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने संगठन को एकजुट रखने के लिए बेहद आक्रामक और स्पष्ट रणनीति अपनाने का संकेत दिया है।

​जिन्हें जाना है जाएं, नहीं रोकूंगी
​बैठक में मौजूद नेताओं और उम्मीदवारों का मनोबल बढ़ाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जो लोग दूसरी पार्टियों में जा रहे हैं या जाने का मन बना रहे हैं, उन्हें जाने दें। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी को भी जबरदस्ती रोककर रखने में विश्वास नहीं रखतीं। अगर कुछ लोगों की अपनी मजबूरियां हैं और वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। ममता ने नेताओं को भरोसा दिलाया कि वह इस संकट से डरने वाली नहीं हैं और शून्य से शुरुआत करके पार्टी को नए सिरे से खड़ा करेंगी।

​ममता बनर्जी की अपील: क्षतिग्रस्त दफ्तरों को फिर से खोलें
अपनी हार को स्वीकार करते हुए ममता बनर्जी ने जमीन पर मौजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं को तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके साथ वफादारी से रुक रहे हैं, वे सबसे पहले उन पार्टी दफ्तरों को ठीक करें जो चुनाव के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उन पर नया रंग-रोगन करें और उन्हें दोबारा खोलें। कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए टीएमसी सुप्रीमो ने यहाँ तक कह दिया कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह खुद भी उन दफ्तरों को पेंट करने के लिए तैयार हैं।

​291 सीटों में से 211 उम्मीदवार हारे, ममता बनर्जी खुद भवानीपुर से हारीं
इस चुनाव में टीएमसी को लगा सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी की हार है, जो अपने पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो पार्टी ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि 3 सीटें सहयोगी दल बीजीपीएम (BGPM) को दी थीं। चुनाव लड़ने वाले 291 उम्मीदवारों में से 211 उम्मीदवार अपनी सीट हार गए हैं, जिनमें ममता सरकार के कई दिग्गज नेता और निवर्तमान मंत्री भी शामिल हैं।

​जनादेश और ‘वोट लूटने’ का आरोप
​हार की इस बड़ी समीक्षा के बीच, टीएमसी ने एक बार फिर चुनावी नतीजों और ईवीएम की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कड़ा आरोप लगाया कि जनता के वास्तविक जनादेश को ‘लूटा’ और ‘चुराया’ गया है। हार के बावजूद पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और इस ‘चुराए गए जनादेश’ के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया है।

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