देखिए स्वास्थ्य मंत्री जी… लोरमी मातृ-शिशु अस्पताल की लापरवाही, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुई डिलीवरी

0

यह पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक, महिला प्रसव के लिए सोमवार को परिजनों के साथ अस्पताल पहुंची थी. इस दौरान अचानक पूरा प्रसव रूम अंधकारमय हो गया. जिम्मेदारों के अनुसार मौसम में बदलाव कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई और बैकअप सिस्टम इन्वर्टर व जनरेटर का कंट्रोल पैनल शॉर्ट सर्किट होकर ट्रिप हो गया था. इसी कारण अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित रही है. महिला आधे घंटे तक दर्द में तड़पती रही. एक घंटे की पीड़ा के बाद नर्सों ने मोबाइल टॉर्च जलाकर प्रसव कराया.

नर्सों ने कहा- जिससे शिकायत करना है कर दो…

प्रसव पीड़ा झेल रही महिला के पति हेमंत ने बताया कि जब वह अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल आया तो बिजली थी, प्रसव पीड़ा को देखते हुए नर्सों ने आपातकालीन कमरे में लेकर पहुंचे, लेकिन प्रसव कराने की प्रक्रिया शुरू करते, उससे पहले ही लाइट बंद हो गई. पूरे हॉस्पिटल में अंधेरा छा गया. पत्नी तड़पती रही फिर मोबाइल के टार्च रोशनी से प्रसव हुआ. गनीमत रही है कि कुछ हुआ नहीं. मैं बहुत डर गया था, भगवान ने मेरे बच्चे और पत्नी को बचा लिया, क्योंकि डॉक्टर नहीं थे. जब नर्सों से पूछा तो उन्होंने कहा कि अरुण साव से शिकायत कर दो… जिससे करना है कर दो… अधिकारी नहीं हैं, डॉक्टर नहीं है… तो हम क्या करें.

स्वास्थ्य विभाग ने इसकी सफाई में खराब मौसम और को जिम्मेदार ठहराया है. खंड चिकित्सा अधिकारी BMO द्वारा भेजे गए पत्र में दावा किया गया कि तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक कर लिया गया और अब बिजली व्यवस्था सुचारू है.

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का सख्त बयान

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे टीएस सिंहदेव ने मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सरकार अस्पतालों में व्यवस्थाएं इसलिए करती हैं, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें. प्रसव जैसे संवेदनशील समय में मां और बच्चे की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है. अगर जनरेटर और अन्य उपकरण समय पर काम नहीं कर रहे थे, तो यह गंभीर लापरवाही है. यह जान से खिलवाड़ है. BMO की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि सभी सिस्टम ठीक से काम करें. डिलीवरी के समय डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है. सिंहदेव ने जोर देकर कहा कि बार-बार ऐसी लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

लापरवाही पर उठ रहे सवाल

जमीनी हकीकत यह है कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल उठ रहे हैं. अगर अस्पताल में बैकअप सिस्टम मौजूद था तो वह वक्त पर क्यों काम नहीं आया ? डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नर्सों के भरोसे डिलीवरी क्यों कराई गई ? क्या केवल मौसम को दोष देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है? वहीं जनता के बीच सवाल है कि क्या ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों दोहराई जा रही हैं. बहरहाल देखना होगा कि इस मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है या फिर मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here