Naxal Free Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) ने माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की रणनीति, अब तक की प्रगति और भविष्य के लक्ष्य साझा किए. उन्होंने कहा कि राज्य में माओवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक बढ़त मिली है और वर्तमान में यह समस्या लगभग समाप्ति के कगार पर है. डिप्टी सीएम ने कहा नक्सलवाद के किले को तोड़ने वाले Cobra कमांडो, CRPF, DRG और छत्तीसगढ़ पुलिस को सैल्यूट!
जनवरी 2024 की बैठक से रखी गई अभियान की नींव
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि माओवाद के खिलाफ इस बड़े अभियान की नींव जनवरी 2024 में हुई एक अहम बैठक में रखी गई थी. इस बैठक में CRPF, BSF समेत सभी केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट रोडमैप दिया गया, ताकि समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
31 मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य
शर्मा ने कहा कि 24 अगस्त 2024 तक सभी एजेंसियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसके बाद 31 मार्च 2026 तक माओवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया. इस रणनीति में “मल्टी-डायमेंशनल अप्रोच” अपनाई गई है, जिसमें केवल सुरक्षा कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक पहलों को भी समान रूप से महत्व दिया गया.
बस्तर की जनता और सुरक्षाबलों को दिया श्रेय
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय बस्तर की जनता को जाता है, जिन्होंने माओवाद को स्वीकार करना छोड़ दिया और शांति का रास्ता चुना. उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस और बलिदान की भी सराहना करते हुए कहा कि इंटेलिजेंस सिस्टम के अपग्रेड होने से सटीक और प्रभावी ऑपरेशन संभव हो सके हैं.
संवाद और पुनर्वास से बदली तस्वीर
विजय शर्मा ने बताया कि नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जैसे माओ प्रभावित इलाकों में समाज के प्रमुखों और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद किया गया. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में लोगों ने मुख्यधारा में लौटते हुए पुनर्वास का रास्ता चुना. एक अक्टूबर 2025 को 210 लोगों ने पुनर्वास स्वीकार किया.
99 प्रतिशत माओवाद खत्म होने का दावा
उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों और स्थानीय भाषाओं में सूचना प्रसारण से सामाजिक बदलाव आया है. वर्तमान स्थिति में छत्तीसगढ़ में लगभग 99 प्रतिशत माओवाद खत्म हो चुका है और बचे हुए सक्रिय कैडर बेहद सीमित हैं, जो किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं.



