LPG सब्सिडी के लिए आधार सत्यापन पर घिरी केंद्र सरकार, दिल्ली हाई कोर्ट ने दो हफ्ते में मांगा जवाब

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नई दिल्ली
घर में रसोई गैस का सिलेंडर बुक कराने के लिए अब आधार का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी परेशानी की वजह बन सकता है। खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल खड़ी कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी लेने के मकसद से 1 अक्टूबर से लागू किए गए इस नियम पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट आधार की अनिवार्यता पर सीमाएं तय कर चुका है, तो फिर यह शर्त क्यों लगाई गई?

बुधवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी किया। वकील पुलकित लूथरा की जनहित याचिका पर सभी पक्षों को दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

दिव्यांग उपभोक्ताओं की परेशानी
याचिकाकर्ता की 75% स्थायी दृष्टिबाधितता है। उनका कहना है कि आइरिस यानी आंख की पुतली के आसपास के हिस्से की पहचान से होने वाला सत्यापन उनके और दूसरे दृष्टिबाधित उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल है।
याचिका में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले का हवाला देकर अनिवार्य आधार सत्यापन के कानूनी आधार पर सवाल उठाया गया है।

सरकार ने क्या दलील दी?
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों की समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील जोहेब हुसैन ने दलील दी कि आधार कानून की धारा 7 के तहत अनिवार्यता सरकारी खजाने से वित्तपोषित सब्सिडी, लाभ या सेवाओं पर लागू होती है।

3.1 करोड़ उपभोक्ताओं पर असर
याचिका में 17 सितंबर के मंत्रालयी पत्र और 19 सितंबर की प्रेस रिलीज का हवाला है। इसमें सत्यापन पूरा नहीं करने वालों की रिफिल बुकिंग रोकने और असमर्थ या अनिच्छुक उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर 5 या 10 किलो के सिलेंडर तक सीमित करने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत मांगी, लेकिन कोर्ट ने पहले सरकार का जवाब देखने की बात कही।

 

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